
कविता
हिंदी भाषा को मातृभाषा का सम्मान मिले,
इस राह पर और भी कई लोग हमारे साथ आ करके चले,
चलते रहे हैं हम दम भर कर इसी तरह,
साहस करके लोग सभी जगह से आगे आएं,
जो हमारे बीच आ जाए और आगे आगे मशाल लेकर चलें,
देखने वाले यह नजारा देखकर चकित हो जाएं,
कारवां हमारा ऐसी ठाट बाट रुतबा से बढ़ता चले,
हिंदी भाषा को हृदय में बसाऐं हुए रहें सदा हम सभी,
आज जन जन हिंदी भाषा जागरण अभियान में शामिल हों,
प्राणों से प्यारी भाषा को मातृभाषा घोषित करने के लिए
आगे आगे प्रण लेकर के चले ।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)











