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ग़ज़ल


वो कदरदान दोस्ती के हैं।
जो मददगार हर किसी के हैं।

वो हमेशा मिलेंगे मुस्काते,
जो तलबगार हर ख़ुशी के हैं।

टिमटिमाते रहेंगे वो हरदम,
राहबर जो यहाँ सभी के हैं।

आँख से वास्ते निभाते हैं,
अक्स जो दूर रोशनी के हैं।

हैे सभी के लिए दुआ उनकी,
जो निगहबान ज़िंदगी के हैं ।

नाज़ रखते हैं सोचपर अपनी,
वो जिन्हें बात के सलीके हैं।
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार मप्र 📌 454441

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