विधा – स्तुति काव्य
आज त्याग समर्पण निष्काम भक्ति का दिन है
कृष्ण की सन्गिनी राधा माँ का जन्मदिन है
मानव कल्याण के लिये विरह को अंगीकार किया
तन से आत्मा का वियोग स्वीकार किया
निस्वार्थ प्रेम का ही वरण हर बार किया
उद्धव का घमंड तार तार किया
गोपियों के धर रूप अनेक मुरली मनोहर को प्यार किया
जग कल्याणार्थ ही प्रभु का वियोग स्वीकार किया
राधा थी कृष्ण की भक्ति की शक्ति
आदिशाक्ति स्वरूपा माँ सम्पूर्ण धरा का उद्धार किया
नमन है माँ राधे
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र













