
एकदंत दयावंत ,गजानन प्रभु गणेश हो
विघ्न हरे कष्ट हरते, ज्ञान के स्वरूप हो ।।
रिद्धि सिद्धि वाम अंग, संग विराजमान है
चैतन्य प्रभु परमात्मा ,अद्भुत विख्यात हो।।
गजानन गणपति , श्री ब्रह्म के स्वरूप हो
आत्मा के उत्कर्ष हेतु, भक्ति के प्रपात हो ।।
वक्रतुंड भालचंद्र, महाकाय सूर्य समान हो
अंधकार भेदक प्रभु , सृष्टि के बिहान हो ।।
बुद्धि ,विद्या के सागर , अनंत ज्ञान धारा हो
चेतना परम पुष्प सी, शक्ति के प्रमाण हो ।।
गौरी पुत्र हे गणेश,हर घर मंगल निवास हो
मंगल कलश का प्रभु , हर घर स्थान हो ।।
पाप हरो ,कष्ट हरो , श्री विघ्न का विनाश हो
सेवा करें भक्तजन गजानंद ,सर पर तेरा हाथ हो ।।
आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश ग्वालियर,












