
एक बात बोलूं साहेब,तबाही मचाने वाले ही गवाही देने आता है,
वरना उनको क्या पड़ी है एक को गलत और दूजे को सही साबित करने की।
जैसे बंदर तमाशा करता है जनता देखती है और आमदनी मदारी को होता है,
वैसे ही हम और आप तमाशा करते हैं और आमदनी मुखिया सरपंच को होता है।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,












