
विधा – काव्य
जीवन सुख दुख का एक है रण संग्राम
जीने का एक ही मंत्र हिम्मत को ना दो विराम
पल पल में नई नई चुनौतियों से होता है सामना
सच्चा कर्म ही आपका ध्येय है बेमकसद कामना
समय काल परिस्थितियों का एक बेमुराद अफ़साना ये जीवन होता है
अपना कुछ नहीं सिवा हिम्मत से जूझना ही सटीक निशाना होता है
संपूर्ण जीवन ही एक अनसुलझा सा जीवंत घोर मसला है
उधेड़बुन की पथरीली राहों में फ़र्ज़ ईमान के साये तले कुचला है
हताशा और निराशा का ये अजब दौर है
बस इंसान सिवा हिम्मत नहीं कोई जोर है
व्यावसायिकता की इस आंधी में रिश्ते नाते सब मिट्टी हो गये
काम क्रोध मोह लोभ में क्या थे क्या हो गये
लड़ाई खुद से ही खुद की हे मालिक सरपरस्त हो गई
हिम्मत ही थी एक सलामत बाखुदा विराम हो गई
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












