स्वप्न सजदा हुआ तो हवन हो गया,
नैन झरने बहे तो आचमन हो गया।
ख्वाब महका तो जैसे चंदन हो गया,
अश्क़ ढलके तो गंगा का जल बन गया।
मन पवित्र हुआ तो सावन हो गया,
साँस ने नाम लिया तो सुमिरन हो गया।
पीर घुली सुरों में तो आरती बनी,
दर्द को राग मिला तो भजन हो गया।
रात भर जाग कर तेरा ध्यान किया,
हर अँधेरे में तुझको ही दीपक जिया।
तू न आया तो क्या, तेरी यादों ने ही,
मेरे सूने घरौंदे को मंदिर किया।
जब से तुमसे जुड़ा ये मेरा मन गया,
लौकिक सारा बंधन तो बंधन गया।
प्रेम पूजा बना, पूजा प्रेम बनी,
तन रहा यहीं पर, मन वृंदावन गया।
शब्द थकने लगे, अर्थ मौन हुआ,
तू मिला तो मेरा हर अधूरा पूर्ण हुआ।
जो कभी घाव थे, वो प्रसाद हो गए,
जो कभी शाप थे, आशीर्वाद हो गए।
अब न शिकवा रहा, न कोई गिला रहा,
तेरे चरणों में ही मेरा सिला रहा।
अमन मिट गया, बस तू ही बचा रहा,
तू मिला तो मुझे, खुदा मिला रहा।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला अमन सनातनी
सावनेर नागपुर महाराष्ट्र











