
हे भारत के आधुनिक भाग्य विधाता,
हे राजनीति के नेता, अभिनेता जी,
अब आपसे मैं आदित्य क्या कहूँ,
आप सरल हृदय तो हैं ही नहीं,
शब्दों के जादूगर ज़रूर हैं और
एक अच्छे इंसान हैं, पता नहीं!
पर देश की राजनीतिक सच्ची
देश-भक्ति के भक्त आप ही हैं।
इतना ही नही, आप में भारत के
इतिहास, भूगोल, संस्कृति, राजनीति
व मानवता के प्रामाणिक ज्ञान
प्राप्त करने की कला का नितांत अभाव,
मानवीय व सामाजिक भावना से
खिलवाड़ जैसी सूझबूझ, मौजूद है,
इसीलिये सभी नेता मानते हैं।
भाषण बाज़ी एवं धर्म, जाति के
अलंकारिक भाव भरना, अच्छे इंसान,
ज्ञान प्राप्त करने की सूझबूझ,
मानवीय भावना व्यक्त करने की कला,
की प्रशंसा के पात्र आप होते तो,
आदित्य कहते हैं, आप के लिए
भारतरत्न की माँग भी हम करते।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ











