
अर्चना उस देश की,
वंदना उस देश की।
आओ, सब मिलकर करें
अभ्यर्थना उस देश की।
जिसकी आँखों में रचा है
एकता का नर्म काजल,
दया ममता त्याग करूणा से है
पुरित जिसका आँचल,
आओ सब मिलकर करें
अभ्यर्थना उस देश की।
जिसके आँगन में खिला है
नवरत्न का फूल,
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई—
हैं यहाँ सब भाई-भाई।
अभ्यर्थना उस देश की,
आओ, सब मिलकर करें
वंदना उस देश की।
अर्चना उस देश की।
श्री मति संगीता संचेती
शिक्षिका
जिला नारायणपुर,छत्तीसगढ़











