
पुस्तक का नाम महक कस्तूरी
काव्य संग्रह कुल पुस्तक पेज 96
लेखक श्री राम वल्लभ गुप्ता इंदौरी
समीक्षक
डा मनोज फगवाड़वी
भोपाल में जन्मे श्री राम वल्लभ गुप्ता इंदौरी जी ने एम ए हिंदी लिटरेचर, हिस्टरी, शिक्षा शास्त्र और अंग्रेजी लिटरेचर में की है। महक कस्तूरी से पहले नेमा ने कोस्तुभ और चलो बुलाया आया है आदि अनेक पुस्तक हिंदी साहित्य की झोली में डाली है।
इस पुस्तक में लेखक ने महक कस्तूरी में शामिल रचनाओं को 6 भागों में बांट दिया है जो निम्न है
1राष्ट्र वंदना 2व्यक्तित्व दर्शन 3प्रकृति एवं पर्यावरण 4बाल सुमन वाटिका 5हमारे पर्व और 6 गुलदस्ता वाटिका है।
इंदौरी साहिब का जन्म अदब अदीब के शहर में होने से भी उनकी कर्म भूमि अहिल्या नगर और इंदौर रही है। चाहे वो आजकल इटारसी में वास कर रहे हैं।
राष्ट्र वंदन में
मां भारती का सिंदूर यानी श्रृंगार एवं श्री हनुमान जी शहीदों की कसम, देश की वीरांगनाएं कारगिल विजय आदि देश भक्ति से भरपूर रचनाएं हैं । इबादत में किस तरह की पूजा का वर्णन किया है पढ़ कर ही पता चलेगा। इस भाग में कुल 9 कविताएं हैं ।जो देश भक्ति की खुशबू से सराबोर है।
भाग दो व्यक्तित्व दर्शन में
देश के महान व्यक्तियो को केंद्र बिंदु बना कर इन सभी कविताओं में व्यक्तित्व दर्शन पेश कर एक नई परम्परा शुरू की गई है ।
इन में प्रमुख रूप से मिसाइल मैन श्री अब्दुल कलाम, सरदार पटेल, चाचा नेहरू विश्व कवि तुलसीदास, नरेंद्र नर इंद्र, रतन टाटा अनमोल रतन फिल्म कार विमल राय, स्त्रियों को पढ़ाने वाली सावित्री बाई फुले बेहतरीन रचनाएं हैं। ये रचनाएं केवल ज्ञान वर्धक ही नहीं संग्रहणीय हैं।
भाग 3
प्रकृति एवं पर्यावरण में पेड़ों को सुरक्षित रखने और नदियों नालों को बचा कर रखने पर जोर दिया गया है। इस भाग में बहुत सुंदर कविताएं हैं जिनमें गुलाब की अभिलाषा, शरद पूर्णिमा, मोक्ष, श्वेत धूप के साए मे ,जल तृष्णा आदि विशेष रूप से पठनीय रचनाएं हैं। ये रचनाएं मानस मन गहरा असर छोड़ती है। इन रचनाओं को पढ़ कर दिल को सकूं और रूह को चैन मिलता है। कुल 10रचनाएं है।
भाग 4
इस भाग में बाल मन को अपनी ओर खींचने वाली कविताएं हैं। बाल सुमन वाटिका में बाल वीर, चलों चले स्कूल, गुरु पूर्णिमा , बच्चों के बढ़ते कदम ,भोर सुहानी
आदि श्रेष्ठ रचनाएं हैं। कई कविताओं में व्यंग का पुट और तंज का कमाल देखने लायक है। बाल सुमन वाटिका में कुल 10 रचनाएं हैं ।
भाग 5 हमारे पर्व
इस भाग में कुल 11 कविताएं है जिसमें हमारे देश के विभिन्न त्यौहारों के संबंध में बहुत सुंदर लिखा गया है। विशेष रूप से दीपावली, मकर संक्रांति, दशहरा पूजन, बिहार का मशहूर त्योहार छट पूजा का वर्णन भी पठनीय हैं । अयोध्या में राम ध्वज, राधा अष्टमी, कब आओगे श्याम और री सखी सखी बसंत आया दिल को छू देने वाली रचनाएं हैं। मूल रूप से लेखक तंज व्यंग में माहिर है और अप्रैल फूल में इसे देखा जा सकता है।
भाग 6
इस भाग में सर्वश्रेष्ठ उच्च कोटि की कविताएं हैं। जिन्हें बार बार पढ़ने को मन करता है। इस भाग में कुल 4रचनाएं हैं। प्रमुख रूप से अंधा कानून, हार नहीं मानूंगा यार, आईना और प्रायश्चित पठनीय हैं। इन रचनाओं में असलियत बयां की है और कहीं कहीं तंज की गूंज भी होती दिखाई दे रही है।
प्यासा मन पानी की तलाश में दर दर भटकता है पर वो कहीं नहीं मिलता रेगिस्तान में। लेखक भी भटकता फिरता है। जब वो अपने मन के भावों को कविताओं के रूप में पन्नो पर उकेर लेता है तो उसे कुछ सकूं मिलता है।
जिस प्रकार मृग कस्तूरी की तलाश में दर दर भटकता है ,उसी प्रकार मानव भी प्रभु की तलाश में मंदिर मंदिर
उसे ढूंढता है। पर वो उसे कहीं नहीं मिलता। कबीर साहब ने भी कहा है जो दिल खोजता अपना तो मिल जाता पर उसे बाहर ढूंढते फिर रहे हैं लोग । कस्तूरी की सुगन्ध मृग की नाभि में ही होती है पर वो उसे बाहर खोजता फिरता है। थक हार कर एक दिन अपने प्राण त्याग देता है।
आशा है महक कस्तूरी काव्य संग्रह अपनी खुशबू से ये सारा संसार महका देगी। इस सुगंधी को दुनिया में फैलाने में सम्माननीय राम वल्लभ गुप्त इंदौरी साहिब का योगदान सदा याद रखा जाएगा।
प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि लेखक को इससे भी बढ़िया ज्ञान वर्धक एवं रोचक कविताएं लिखने में नेक मन बुद्धि दे। विद्वान लेखक ने महक कस्तूरी काव्य संग्रह की खुशबू सम्पूर्ण जगत में बिखेर कर हिंदी साहित्य में धमाल कर दिया है।
आमीन
डा मनोज फगवाड़वी फगवाड़ा पंजाब












