
रोशनी में तम मिलेंगे।
हर ख़ुशी में ग़म मिलेंगे।
अब वफ़ा की शान वाले,
लोग थोड़े कम मिलेंगे।
हो सकेंगे एक मत वो,
सोच में जो सम मिलेंगे।
कारवां बढ़ता रहेगा,
सब कहाँ हरदम मिलेंगे।
जो इशारे हैं जहाँ के,
वो वहाँ पर थम मिलेंगे।
अश्क़ जिन पर जम गए हैं,
गाल थोड़े नम मिलेंगे।
ढूंढ़ते वो हो आप उनको,
जिस ठिकाने हम मिलेंगे।
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार मप्र











