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सादगी का शिखर पुरुष : लाल बहादुर शास्त्री

मुगलसराय की पुण्य धरा पर, भारत का लाल जन्मा था,
रामदुलारी की गोद में पलकर, संघर्षों में वह ढला था।
‘नन्हे’ से उस बालक ने फिर, इतिहास नया रच डाला,
साधारण जीवन जीकर जिसने, भारत का मस्तक ऊँचा कर डाला॥

काशी विद्यापीठ से पाई, ज्ञान-दीप की अनुपम ज्योति,
‘शास्त्री’ बनकर कर्मभूमि में, जगाई नव चेतना की ज्योति।
नाम नहीं, कर्मों से अपनी, पहचान बनाई महान,
सादगी को शक्ति बनाकर, पाया जन-मन में सम्मान॥

गांधी के विचारों से प्रेरित, आज़ादी का स्वप्न सजाया,
असहयोग से भारत छोड़ो तक, संघर्षों में कदम बढ़ाया।
जेल की दीवारें रोक न पाईं, मन की वह स्वाधीन उड़ान,
भारत माँ की सेवा बन गई, उनके जीवन की पहचान॥

सत्ता उनके लिए कभी भी, सुख-सुविधा का साधन न थी,
जनता के प्रति जिम्मेदारी से, बड़ी कोई भी साधना न थी।
रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी अपने सिर लेकर,
त्याग दिया मंत्री पद उन्होंने, आदर्शों को सबसे ऊपर रखकर॥

नेहरू के बाद देश ने पाया, सरल हृदय दृढ़ नेतृत्ववान,
कठिन समय में धैर्य दिखाकर, बढ़ाया भारत का सम्मान।
संकट के घने अँधेरों में भी, आशा का दीप जलाया,
कर्तव्य-पथ से विचलित न होकर, राष्ट्रधर्म निभाया॥

सीमा पर जो प्राण लुटाएँ, वे भारत के वीर जवान,
धरती पर अन्न उगाएँ, वे भारत के गौरव किसान।
दोनों की शक्ति से सुरक्षित, देश की धरती और आसमान,
शास्त्री जी के स्वर में गूँजा, “जय जवान, जय किसान।”

जब सीमा पर संकट आया, राष्ट्र एक स्वर में खड़ा हुआ,
शास्त्री जी के दृढ़ नेतृत्व में, भारत का संकल्प बड़ा हुआ।
वीरों ने रणभूमि में लिख दी, साहस की अमिट कहानी,
देश की माटी ने फिर गाई, वीरों के गौरव की वाणी॥

न पद का मद, न सत्ता का मोह, न वैभव का कोई अभिमान,
सादा जीवन, ऊँचे विचार, यही रहा उनका सम्मान।
जनसेवा को धर्म मानकर, जीवन किया राष्ट्र के नाम,
इसीलिए इतिहास के पन्नों में, अमर हुआ उनका नाम॥

शांति का संदेश लिए वे, ताशकंद की धरती पर गए,
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर, संवाद के पथ पर बढ़े।
ग्यारह जनवरी की वह रात, इतिहास कभी न भूल सकेगा,
शास्त्री जी का निर्मल जीवन, युगों-युगों तक बोल सकेगा॥

मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से, राष्ट्र ने किया सम्मान,
पर जन-जन के हृदय में पहले से, अमर था उनका नाम।
सत्य, सादगी और सेवा का, वे बन गए जीवंत विधान,
लाल बहादुर शास्त्री को, शत-शत नमन, शत-शत प्रणाम॥

छोटा हो या बड़ा पद, ऊँचा होना चाहिए विचार,
राष्ट्रहित में समर्पित जीवन, बनता सच्चा जीवन-सार।
शास्त्री जी की जीवन-गाथा, देती हमको यही ज्ञान,
सादा जीवन, उच्च विचार और सर्वोपरि हिंदुस्तान।

रूपेश कुमार
चैनपुर, सीवान, बिहार

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