
शीर्षक: पूर्वज
पूर्वजों की मधुर स्मृतियाँ,
मन में भरती प्यार।
उनके पावन संस्कारों से,
जीवन हो उजियार।
बीते दिनों की मीठी बातें,
मन में भरती राग।
उनकी हँसी की गूँज सँजोकर,
मन में जागे अनुराग।
जब-जब राह कठिन हो जाए,
याद करें उपकार।
सत्य, सरलता, प्रेम की राहें,
बनें जीवन का आधार।
दूर हुए वे, फिर भी उनकी,
यादें हैं अनमोल।
पीढ़ी-पीढ़ी दीप जलाएँ,
रखें धरोहर मोल।
छाया शाह ‘सख्य’ मुंबई(कच्छ)













