
खुद पर हो विश्वास यदि, बनते सारे काम।
कर्मों के व्यवहार से, फल मिलता अभिराम।
भक्त करें जयकार है, शक्ति-भक्ति में लीन,
महावीर करते कृपा, जो जपता है नाम।।
नाम बड़ा प्यारा लगे, बजरंगी हनुमान।
कृपा मिली हैं राम की, अतिशय जो बलवान।
साहस शौर्य अपार है, फैली त्रिभुवन कीर्ति,
रक्षक इस संसार के,रचते नवल विधान।।
दुख हर्ता हनुमान हैं, रुद्र अंश अवतार।
भव से नैया पार कर, लेते कष्ट उबार।
जो करता गुणगान है, प्राप्त करें हर लक्ष्य,
मन विचलित होता नहीं, चले धैर्य जो धार।।
धन दौलत छूटे यहीं,नेक कमाई साथ।
सबका रखना मान है, झुका नित्य ही माथ।
सत्य धर्म संस्कार की, जले हृदय जब ज्योति,
तब करते प्रभुवर कृपा, धरें शीश पर हाथ।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश













