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एक कविताजिसमें संस्कार मिलता है,

कविता

एक कविता
जिसमें संस्कार मिलता है,

कोरे कागज पर
शब्दों का उपवन खिलाता है,

आपसे मुझे लिखने का होंसला मिलता है,

आपसे जुड़े हुए रहने में रचना कारों का काफिला मिलता है,

आपके विचारों में जूनून जो मिलता है,

जिंदगी में मुझे बेहिसाब सुकून मिलता है,

मुस्कुराहट चेहरे पर रहतीं हैं सदा मेरे,
तुम्हारी लेखनी की
संगत में रहने से,

ज़िंदा है हम यह एहसास मिलता है,

आदरणीय आपसे हि मुझे,

खास आशीर्वाद जो मिलता ,

साहित्य साधना है, इसमें सभी का प्यार मिलता है,

इस राह में नित्य नया यार मिलता है ,

कलम को मेरी कुछ करने को जो इज़हार मिलता है,

ऐसा कहां है और जगह सम्मान,

मिल रहे हैं तो
एक नया संसार मिलता है।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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