
ग़ज़ल
चुप रहोगे तुम तो दिल की बात करेगा कौन,
हम नहीं होंगे तो फिर तुमको याद करेगा कौन।
रूठ जाओगे अगर तुम, तुमको मनाएगा कौन,
आँख भर आएगी जब, तुमसे फ़रियाद करेगा कौन।
माना हमसे भी हुई होंगी ख़ताएँ बे-शुमार,
हम न होंगे तो तुम्हें फिर बर्बादी से बचाएगा कौन।
हमने हर दर्द को हँसकर भी छुपाया था कभी,
अब हमारे दर्द के किससे मुराद करेगा कौन।
जब अँधेरों में तुम्हें कोई सहारा न मिले,
हम-सा बनकर फिर तुम्हें आबाद करेगा कौन।
तुम अकेले बैठकर जब बीते लम्हे सोचोगे,
उन लम्हों में मेरे जैसा संवाद करेगा कौन।
मेरी आदत थी तुम्हें हर बात पर समझाना,
मेरे जाने के बाद तुमको इरशाद करेगा कौन।
मैं जो तुम्हारी ख़ामुशी को भी समझ लेता था ,
मेरे जैसा फिर तुम्हें याद करेगा कौन।
तुमको तकलीफ़ में देखकर जो बेचैन हो जाए,
मेरे जैसा तुम्हारी फ़रियाद करेगा कौन।
रिश्ते बाज़ारों में मिलते ही नहीं हैं हर जगह,
टूट जाएँ जो तो फिर दिल को आबाद करेगा कौन।
हमने चाहा था तुम्हें ख़ुद से भी बढ़कर उम्रभर,
हम न होंगे तो तुम्हें इतना इरशाद करेगा कौन।
वक़्त के हाथों अगर ये फ़ासले बढ़ते गए तो,
तुम्हारे दिल के ज़ख़्मों का फिर इलाज करेगा कौन।
आज शायद मेरी क़द्र तुम्हें मालूम नहीं,
कल मेरी कमी का फिर हिसाब करेगा कौन।
हम चले जाएँ अगर दुनिया से चुपचाप एक दिन,
तुम्हारी आँखों से बहकर वो फ़रियाद करेगा कौन।
मक़ता
धर्मेंद्र, रिश्ते सँभालो—वक़्त लौटकर आए न आए,
टूटे रिश्तों को फिर से आख़िर आबाद करेगा कौन।
स्वरचित एवं मौलिक
✍धर्मेंद्र कुमार राठौर
पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय झालावाड़ पुराना भवन राजस्थान













