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गीत

गीत


हवाओं के संग,ये इकरार भेजा है।
घटाओं के साथ,ये इजहार भेजा है।।
विरह में तुम हरदम उदास प्रिऐ मत रहना,
मन से निकला ये,दिले विचार भेजा है…..


पहली मुलाकात,मितवा याद आती है।
मेरा अंतर्मन, खुब झकझोर जाती हैं।।
तुम भूल न जाना,प्यार भरा मिलन पहला,
कुसुमित कली ने,ये गलहार भेजा है…..


कहे तो प्यार के, दो किनारे हैं मगर,
प्यार में जीत है,चाहे कठिन रहे डगर।।
सनम मिल ही जाएंगे, हटा सभी बाधा,
सींचकर प्यार से मधु ने सार भेजा है…..


निशा भी होती, हैं संध्या भी होती हैं।
प्रेम सावन में,बरसात भी होती हैं।।
इस महोब्बत में,दिल बेजार बिचारा,
प्रेम का मनहर,तुझे संसार भेजा है…..


प्रेम अगन में तन, जले और झार ना हो।
चाहत मैं तरसे,नयन आंसू धार ना हो।।
हम देगें परीक्षा, प्रेम की हरबार मितवा,
सहेज रखा है,प्रेम ने आगार भेजा है…..

गीतकार मनोहर मधुकर

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