
करवा चौथ विशेष |
तेरे होने से मेरी रूह में उजाला रहे,
मेरी हर दुआ में बस तेरा हवाला रहे।
मैं चाँद से तेरी उम्र की भीख माँगूँगी,
जब तक मेरी साँसों में साँसों का सिलसिला रहे।
ये व्रत नहीं, मेरे विश्वास की गहराई है,
मेरे प्रेम ने हर रस्म में रूह समाई है।
मैंने चाँद में देखा है तेरा ही चेहरा,
मेरी आँखों में तेरी याद उतर आई है।
मेरी मेहँदी के रंगों में तेरा नाम रहे,
मेरे माथे की बिंदिया पर तेरा एहतराम रहेl
ज़िंदगी की धूप में जब भी थक जाऊँ मैं,
तेरी बाँहों में मेरे दर्द को आराम मिले।
मैं तुझसे सिर्फ़ तेरी उम्र नहीं माँगती,
तेरे हर दिन में ख़ुशियों का सवेरा माँगती हूँ।
तू जहाँ भी रहे, महफ़ूज़ रहे, आबाद रहे,
मैं तेरे लिए बस इतना-सा ख़ुदा से माँगती हूँ।
कभी हालात की आँधी हमें कमज़ोर न करे,
कभी ग़लतफ़हमियाँ मोहब्बत को चकनाचूर न करें।
तेरा हाथ मेरे हाथ में उम्र भर यूँ ही रहे,
कोई मौसम हमारे दरमियाँ दीवार न करे।
चाँद निकले तो मेरी पलकों पे दुआ ठहरे,
तेरा चेहरा मेरी आँखों में सदा ठहरे।
ये ज़रूरी नहीं हर ख़्वाब मुकम्मल हो जाए,
बस हमारा भरोसा हर हाल में ज़िंदा ठहरे।
और सुनो मेरे हमदम, एक बात याद रखना,
मेरे सजने का सबब सिर्फ़ तुम्हारा प्यार है।
मेरी पूजा, मेरी चाहत, मेरा विश्वास हो तुम,
मेरे जीवन की किताब में तुम्हीं पहला अध्याय हो।
जब कभी चाँद बादलों में कहीं खो जाएगा,
मेरे प्रेम का दीप फिर भी जलता जाएगा।
करवा चौथ की रात गवाह रहे इस रिश्ते की,
मेरा दिल हर जन्म तुझे ही अपना बताएगा।
रचनाकार: श्री ठाकुर
देवघर,( झारखंड)













