
आज चाँद तो निकला है, पर चाँदनी उदास है,
मेरे हाथों में तुम्हारी मेहँदी, आँखों में प्यास है।
जिसके लिए रखा था, वो व्रत अधूरा रह गया,
मेरा करवा चौथ सजकर भी, तन्हा रह गया।
चाँद ने तो अपना वादा, हर बार निभाया है,
मेरा चाँद ही जाने क्यों, लौटकर नहीं आया है।
सुबह सर्गी के थाल में, तुम्हारी याद सजाई थी,
तुम्हारे हाथों की चाय की खुशबू, मन यूं समाई थी।
लाल जोड़े में बैठी थी, लेकर आँखों में सपने,
सोचा था तुम आओगे, बाँहों में मुझको भरने।
दरवाज़े की हर आहट पर, दौड़ के जाती थी,
तुम्हारे आने की उम्मीद में, खुद को समझाती थी।
लेकिन शाम ढली तो मेरे, सपने भी ढलते गए,
दीपक जलते रहे मगर, अरमान पिघलते गए।
आज चाँद तो निकला है, पर चाँदनी उदास है,
हाथों में तेरी मेहँदी, आँखों में प्यास है।
जिसके लिए रखा था, वो व्रत अधूरा रह गया,
मेरा करवा चौथ सजकर भी, तन्हा रह गया।
छलनी में जब चाँद देखा, तुम्हारा चेहरा ढूँढ़ा था,
अपने हर खुशियों का, तुझसे नाता जोड़ा था।
एक तरफ था आसमान में, चाँदी जैसा चाँद,
एक तरफ तस्वीर तुम्हारी, और बिखरे मेरे अरमान।
लोटे का वो जल भी जैसे, मुझसे सवाल करे,
किसके नाम की पूजा है, जो तेरा इंतज़ार करे?
कैसे तोड़ूँ व्रत अपना, कैसे तुझे भुलाऊँ,
तेरी सलामती की खातिर, किससे दुआ करवाऊँ?
तेरी कलाई पर बाँधा था, प्यार का एक धागा,
तेरे संग ही देखा था मैंने, जीवन का हर सपना।
आज उसी आँगन में तेरी, यादों का पहरा है,
मेरे माथे का सिंदूर भी, तुझ बिन कितना गहरा है।
चूड़ियाँ खनकती हैं, मगर संगीत नहीं आता,
तेरे बिना इस दिल को, अब कोई गीत नहीं भाता।
सब कहते हैं, चाँद देखकर, व्रत अपना खोलो,
मन में छिपे हुए आँसू, अब आँखों से मत बोलो।
कैसे कह दूँ सबसे कि मेरा, चाँद ज़मीं पर नहीं,
कैसे मानूँ दिल को कि तू, अब मेरी तक़दीर नहीं?
अगर कहीं से सुनते है तुम, मेरी ख़ामोशी को,
एक बार लौट आना सुनने, दिल की इस मदहोशी को।
तुम्हारे नाम की मेहँदी अब भी, हाथों में मुस्काती है,
पर तुम बिन हर खुशहाली, मुझको रुला जाती है।
कल फिर सूरज निकलेगा, फिर दुनिया मुस्काएगी,
मेरे घर की सूनी चौखट, फिर तुझको बुलाएगी।
हर करवा चौथ पर शायद, ये दिल तुझे पुकारेगा,
चाँद तो पूरा होगा, सजना चांद से मुझे निहारेगा।
आज चाँद को अर्घ्य देकर, बस इतना कह पाई हूँ,
तुम्हारी खुशियों की खातिर ही, हर पल जीती आई हूँ।
व्रत तो शायद टूट गया, पर प्यार नहीं टूटेगा,
तेरा मेरा रिश्ता सजना, यादों में नहीं छूटेगा।
चाँद गगन में पूरा है, पर मेरा संसार अधूरा है,
तेरे बिन ये लाल जोड़ा भी, लगता आज सिंदूरा है।
सबका करवा चौथ मना, सबके घर में उजियारा है,
मेरे हिस्से बस यादें हैं,और तेरा इंतज़ारा है
दिल की कलम से......
रीना पटले शिक्षिका
जिला-सिवनी मध्यप्रदेश













