
गीत
मुखड़ा
सजे घर-द्वार रंगों से, फिजा का रंग न्यारा है।
घरों में हो चली रौनक, दिवाली का इशारा है।
जली दीप लड़ियाँ माला तो, अमावस भी उजाला है।
सजे हैं द्वार अरिपन के,छवि लगे तो मनोहारी ।
सुगंधित फूल की बेला , सजी तुलसी भरी क्यारी ।
हँसी-खुशियाँ घरों आई, चमकता जगत सारा है।
सजे घर-द्वार रंगों से, फिजा का रंग न्यारा है।
मिठाई की महक लेकर, चले लेने दुकानों में।
खिलौने और भेटों की, चमक है अब दुकानों में।
मिले परिवार सारे जब, खुशी की इन बहारों में।
मिले स्नेहिल शुभाशीषें, शुभ घड़ी समय प्यारा है।
घरों में हो चली रौनक, दिवाली का इशारा है।
जलाएँ दीप सद्भावों के, मिटे मन का अँधेरा भी।
जले विश्वास की ज्योति, रहे न कोई अकेला भी।
बँटे खुशियाँ सभी जन में, रहे हर घर सवेरा भी।
अमिट हो प्रेम की ज्योति, यही संदेश हमारा है।
सजे घर-द्वार रंगों से, फिजा का रंग न्यारा है।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार










