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उड़ जाएगा हंस अकेला


विधा – गीत
रचनाकार सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश
माया जोड़ी तूने जग में पल-पल,
फिर भी न होता तेरा मसला हल,
अरे!तेरा उड़ जाएगा हंस अकेला।

खग करते सदा ही व्योम में सैर,
बन्दे निज कर्म से जान को लें तैर,
अरे! तेरा पंछी जैसा जग में घोंसला।

धरा पर प्राणी मत बन तू उल्लू जैसा,
आंखें बन्द कर देख मन में रब कैसा,
अरे तू मत कर साथ किसी के झमेला।

बन्दे यह तेरी जवानी और यह पैसा,
साथ नहीं जाएगा तेरे पैसा है कैसा,
मौत आने पर तुझे जाएगा धकेला।

रहता परिवार संग कहता सब मेरे,
श्मशान घाट लें जाएंगे तुझको तेरे,
वाणी में रसना घोल मत बन करेला।
स्वरचित और मौलिक गीत
सर्वाधिकार सुरक्षित
सुनील कुमार खुराना
नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश भारत

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