
धर्म की स्थापना हो, ये ज़रूरी है,
पाप भी समाप्त हो, यह ज़रूरी है,
जीवन व मृत्यु काल के आधीन हैं,
धर्म में आस्था हो, यह ज़रूरी है।
जीवन व मृत्यु दोनों ही सत्य हैं,
आत्मा अजर-अमर है ये सत्य है,
स्नान कर जैसे वस्त्र बदले जाते हैं,
आत्मा शरीर बदलती, यह सत्य है।
कर्म का आधार श्री रामचन्द्र हैं,
सत्य का आधार भी रामचंद्र हैं,
रामायण के मर्यादा पुरुषोत्तम हैं,
धर्म का आधार श्री रामचन्द्र हैं।
आस्था का केन्द्र श्रीरामचन्द्र हों,
विश्वास का आधार रामचंद्र हों,
जो भी होता है अच्छा होता है, जब
आस्था के केन्द्र में श्रीरामचन्द्र हों।
जीवन में जो भी हासिल करना हो,
आदित्य राम में आस्था रखकर करो,
जीवन में अवसर एक बार मिलता है,
श्रीराम बार बार मिलें, प्रयत्न करो।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ










