
कर श्याम कृपा आप मुझे, सत्य सिखा दे।
जिस मार्ग मुझे शांति मिले, राह दिखा दे।।
ये मोह डसे रोज मुझे,मार उसे दे।
नित बुद्धि हरे क्रोध कुटिल, जार उसे दे।।
प्रभु द्वेष हृदय त्याग सदा, प्रेम सुनाऊं।
मैं नित्य जगत स्नेह सुधा, राग बहाऊं।।
स्वीकार करो आप मुझे, द्वार खड़ी हूं।
मैं छोड़ जगत आज यहां, पास पड़ी हूं।।
तू वेणु बजा पास बुला, हाथ फिरा दे।
कर देर न अब आप हृदय, दंभ गिरा दे।।
अब और न दुख दर्द सहूँ, गोद उठा ले।
कर माफ मुझे आप सदा, पास बिठा ले।।
तू मात पिता बंधु सखा,मीत हमारे।
प्रभु आप भरे प्राण सदा, गीत हमारे।।
तू सूर्य प्रभा चंद्र किरण, वेग हवा हो।
हर पुष्प भरे आप महक,रत्न रवा हो।
ये सृष्टि कहे जीव चले, आप सहारे।।
हे नाथ रहूं आठ प्रहर,साथ तुम्हारे।।
हर दर्द मिटा आप बनो, छाँव हमारे।
प्रभु आप लगा भक्त सदा, नाव किनारे।।
श्रुति नाम सुने नाम गुने,नाम पुकारे।
ये होंठ जपे नित्य सुबह, नाम तुम्हारे।।
हर शाम सुबह कर्म सतत ,ध्यान तुम्हारा।
कर पांँव धुले श्याम सदा, कर्म हमारा।।
मन दौड़ रहा थाम उसे, शांति मुझे दे।
प्रभु आप जगत रश्मि तुला, कांति मुझे दे।।
भ्रम जाल कटे द्वंद मिटे, शक्ति वही दे।
मन धार जिसे पार लगे, भक्ति वही दे।।
अर्चना आनंद गाजीपुर उत्तर प्रदेश









