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अशांत हृदय

व्यथा से बीती रैन न गुजरी ,

ह्रदयस्थल पीड़ा से न उभरी ।

जब जब हृदय पर अंधकार छाया,

न दिन,न रैन हृदय पर सुकून आया।

जब होता अंतर्मन में पीड़ा के बादल ,

हृदय घबराता मन होता घायल ।

जब जब हृदय दर्द से कराहता ,

न दुआ ,न दवा काम आता ,

एक सुकून अपनो के संग आता ।

लेकर मन में अटूट निश्चय,

ठान लिया हृदय में न आने दूंगी भय ।

भय को जीवन से दूर भगाउँगी ,

एक दिन जरूर भय से जीत जाऊंगी। ।

प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

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