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श्री राम की महिमा

अवधपुरी के राजदुलारे, नयनों के अभिराम,
मर्यादा की मूरत पावन, पुरुषोत्तम श्री राम।

हाथों में कोदंड विराजे, मुख पर मंद मुस्कान,
त्याग और संतोष के स्वामी, मानवता की शान।

पिता वचन की खातिर छोड़ा, राज-पाट और सुख,
वन-वन भटके धीर वीर बन, सहा जगत का दुःख।

शबरी के जूठे फल खाकर, प्रेम का मान बढ़ाया,
केवट को दी अपनी करुणा, सबको गले लगाया।

अधर्म का मर्दन करने को, उठाई अपनी चाप,
मिटा दिया रावण का दंभ, हरे जगत के पाप।

राम राज्य की अलख जगाई, सत्य ही जिनका धाम,
कण-कण में जो रमे हुए हैं, वही प्रभु श्री राम।

   रीना पटले, शिक्षिका 

शास हाई स्कूल ऐरमा, कुरई
जिला – सिवनी, मध्यप्रदेश

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