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हिंदी के अस्तित्व को बचाना हमारा कर्तव्य है – कवि संगम त्रिपाठी

     वर्तमान समय में हिंदी भाषा की स्थिति क्या है वह सभी को पता है.....हम विश्व पटल पर हिंदी को स्थापित करने की बहुत जोर शोर से बात करते है......कुल मिलाकर ढिंढोरा पीटते हैं..... ढिंढोरा पीटने में सभी लगे हैं इसमें दो मत नहीं है...... देखिए ढिंढोरा पीटने जैसे शब्द का प्रयोग मुझे स्वयं करने में बहुत दुख महसूस हो रहा है पर वास्तव में यही हकीकत है। सरकारी स्तर से लेकर हम साहित्य सेवी तक हिंदी को उचित सम्मान दिलाने में जो आडंबर रच रहे है वह सिर्फ और सिर्फ अपनी भाषा को महिमा मंडित करने के अलावा कुछ भी नहीं है। 
            दुनिया में सबसे अधिक विद्वान भारत में है और सारी दुनिया में एक हमारा ही देश है जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं है और हम विश्व गुरु बनने की बात करते है....... कितनी हास्यास्पद बात है।
            सच में हमे अपनी भाषा अपनी संस्कृति को समृद्ध बनाने की दिशा में प्रेरणादायक काम करना होगा। बिना पुरस्कृत हुए सच्चे मन से अपनी भाषा को सम्मान दिलाना होगा। देशवासियों हिंदी के अस्तित्व को बचाना हमारा कर्तव्य है।

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