२३५वीं कल्पकथा साप्ताहिक काव्यगोष्ठी राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान में आयोजित।

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्रप्रथम, हिन्दीभाषा, सनातनसंस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार के तत्त्वावधान में आयोजित २३५वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को समर्पित एक भव्य, भावगर्भित एवं राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत साहित्यिक अनुष्ठान के रूप में सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम की सूचना संस्था की सूचना प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि दो चरणों में संपन्न इस गरिमामयी काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश कुमार दुबे तखतपुर, बिलासपुर छत्तीसगढ़ ने की, मुख्य आतिथ्य देहरादून, उत्तराखण्ड निवासी प्रख्यात कवि नन्द किशोर बहुखंडी का रहाजबकि कार्यक्रम का सुस्पष्ट, संयमित एवं प्रवाहपूर्ण संचालन कोंच जालौन उप्र के ओज शैली के आशुकवि भास्कर सिंह माणिक जी ने किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के मंगलाचरण से हुआ, जिसे नागपुर महाराष्ट्र के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे ने भावपूर्ण स्वर प्रदान किया। तत्पश्चात राष्ट्रभावना से अनुप्राणित काव्यपाठ का क्रम आरम्भ हुआ, जिसमें देश विदेश के विभिन्न अंचलों से जुड़े बीस सृजनकारों ने सहभागिता करते हुए वंदे मातरम् विषय पर अपनी सशक्त, ओजस्वी एवं भावप्रधान रचनाओं का पाठ किया।
इस काव्यगोष्ठी में सहभागिता करने वाले सृजनकारों में हेमचंद्र सकलानी, बिनोद कुमार पाण्डेय, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, अमित पण्डा अमिट रोशनाई डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, ज्योति प्यासी, डॉ. इंदु जैन इंदु, दुर्गादत्त मिश्र बाबा जी, डॉ मंजू शकुन खरे, डॉ ए के एम सुधांशु मिश्र, आनंदी नौटियाल अमृता, भगवान दास शर्मा प्रशांत, आयुष्मान प्रांजल प्रताप मिश्र, विष्णु शंकर मीणा, विजय रघुनाथराव डांगे, भास्कर सिंह माणिक, नन्दकिशोर बहुखंडी, दिनेश कुमार दुबे, दीदी राधा श्री शर्मा तथा पवनेश मिश्र रहे।
कार्यक्रम को विश्राम देने से पूर्व राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” के १५०वें स्मरणोत्सव वर्ष के अवसर पर श्री बिनोद कुमार पाण्डेय जी द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण, स्वरबद्ध गायन ने समूचे वातावरण को देशभक्ति के आलोक से आलोकित कर दिया।
अंत में दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा जी ने सभी अतिथियों, अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, सहभागियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार प्रदर्शन करते हुए कार्यक्रम की सफल परिणति की घोषणा की।कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा आयोजित यह काव्यगोष्ठी राष्ट्रप्रेम, साहित्यिक सौंदर्य और सांस्कृतिक चेतना का एक प्रेरक, स्मरणीय एवं भावसमृद्ध संगम सिद्ध हुई।











