Uncategorized
Trending

ग्रहों से परे दैवी संरक्षण और आत्मबल

ज्योतिष के अनुसार ग्रह हमारे कर्मों के फल को दर्शाने वाले दैवी व्यवस्थापक हैं, पर वे अंतिम सत्ता नहीं हैं। उनसे भी ऊपर ईश्वर की कृपा, गुरु का आशीर्वाद और मनुष्य का जागृत आत्मबल कार्य करता है। जब व्यक्ति सच्चे हृदय से भक्ति करता है, भीतर से प्रार्थना करता है और स्वयं को दैवी चेतना के प्रति समर्पित करता है, तब कठोर से कठोर ग्रहयोग भी शिथिल पड़ सकते हैं। दैवी अनुग्रह अदृश्य सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है, जो केवल बाहरी परिस्थितियों को ही नहीं, बल्कि उन्हें देखने की हमारी दृष्टि को भी बदल देता है।

इसी प्रकार सत्कर्म, सेवा, दान, सत्यनिष्ठा और साधना मनुष्य के चारों ओर आध्यात्मिक शक्ति का ऐसा मंडल बना देते हैं जो ग्रहबाधाओं के प्रभाव को कम कर देता है। ध्यान, जप और आत्मचिंतन से चेतना ऊँची उठती है और तब व्यक्ति केवल कुंडली का पात्र नहीं रहता, बल्कि अपने भाग्य का सजग निर्माता बन जाता है। इस अवस्था में ग्रह शत्रु नहीं, बल्कि जीवन-पथ के संकेतक बन जाते हैं और मनुष्य ईश्वरीय संरक्षण के अंतर्गत साहस, शांति और विश्वास के साथ जीवन यात्रा पूरी करता है।

योगेश गहतोड़ी “यश”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *