
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को शत्-शत् नमन् करती हूँ।
भारत के राष्ट्रपिता को आज पुष्पांजलि अर्पित करती हूँ।।
30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने उनको मारा।
छीन लिया हमारे भारत देश से अनमोल हीरे का सहारा।।
अहिंसा और राष्ट्र के प्रति सद्भावना ही जिन्होंने तारा।
आज वर्तमान में पुनः सुमिरन कर रहा हिंदुस्तान सारा।।
भारत में प्रतिवर्ष शहीद दिवस के रूप में हम मनाते हैं।
इस अवसर पर राजघाट पर सर्वोच्च नेता अवश्य जाते हैं।।
परिसर में एकत्रित होकर सभी बहुरंगी पुष्प चढ़ाते हैं।
महात्मा गांधी की हत्या की स्मृति में मौन सब हो जाते हैं।।
सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के आंदोलन खूब चलाते थे।
सारे कार्य स्वयं करते हुए गांधीजी सेवा करते जाते थे।।
सब्र और सहानुभूति के पाठ सबको पढ़ाया करते थे।
निडर बन कर चलने वाले कभी नहीं किसी से भी डरते थे।।
हम भारतीयों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण दिन होता है।
बापूजी से अथाह प्रेम करने वाला हर नागरिक रोता है।।
खामोशी और खिन्नता में हर कोई शांतिदूत बस होता है।
बेहतर भारत को बनाने में गांधी जी का आभारी होता है।।
स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए बलिदानों को कभी न भूल पाऊँगी।
मैं हिंदुस्तान की सुपुत्री निज महात्माओं के गुण ही हर क्षण गाऊँगी।।
कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)











