
संगठन मे शक्ति है
संगठन मे ही शक्ति है
ये सत्य उक्ति है
जहाँ भी संगठन है
वहां बुद्धि, बल का संगम है
कोई भी समस्या का समाधान
संगठन से हल ,होता है आसान
समाज का हो,गाँव का हो
राज्य या देश का हो
दल का हो,चाहे नेतृत्व का
होती है जरूरत, संगठन का
संगठन मे किसी एक का नही
सबो के बाते सुनते है सही
पुनः गहन चिंतन मनन होता है
अंत मे निष्कर्ष आता है
भला हो सबका
ये बाते दुहराता ह ।
किसी की नमी ,किसी की गरमी
कोई बताये गुण,तो कोई कमी
आखिर सबकी सुना जाता है
जी हाँ, संगठन मे शक्ति होता है
अतः सबके हित की बाते हो
कार्य किसी के ,अहित मे ना हो
तोड़ ना सके,किसी को निर्बल मानकर
छोड़ ना दे,किसी को दुर्बल जानकर
डरा न सके,भय दिखाकर
भगा न दे,अकेला देखकर
ऐसी सब हालातो से बचने हेतु
संगठन सबसे मजबूत है सेतु
जिसमे सबके,सब पार होगे
हरेक समस्या का समाधान होगे
यही बात चुन्नू कवि दुहराता है
आपस मे,एक संगठन की आवश्यकता है
अब भी वक्त है,न किसी के बात मे आवे
एकत्रित हो एक जगह,संगठन बनावे
संगठन मे ही शक्ति है
ये सत्य उक्ति है
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड











