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मॉरीशस में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन।

आयोजन में कतर से भारतवंशी डॉ श्रीमती विनीता कंवर राठौड़ जी की विशेष सहभागिता।

विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन अत्यंत गरिमामय, सुव्यवस्थित एवं आत्मीय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन का केंद्रीय विषय हिंदी शिक्षण : नवाचार और संभावनाएँ रहा, जिसमें विश्व के विभिन्न देशों से पधारे हिंदी विद्वानों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, शोधार्थियों एवं भाषा-प्रेमियों ने सक्रिय सहभागिता कर वैश्विक हिंदी चेतना को सशक्त स्वर प्रदान किया।

इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी संगठन, नीदरलैंड्स के प्रतिनिधित्व में तथा क़तर से सहभागिता करते हुए प्रवासी भारतीय साहित्यकार एवं हिंदी शिक्षाविद डॉ. विनीता कंवर राठौड़ को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।

सम्मेलन के प्रथम दिवस को हिंदी सचिवालय, फिनिक्स (मॉरीशस) के मुख्य मंच से डॉ. विनीता कंवर राठौड़ ने अपना शोध आलेख प्रस्तुत किया, जिसमें हिंदी शिक्षण के समकालीन नवाचारों, प्रवासी संदर्भों तथा भविष्य की संभावनाओं पर सारगर्भित एवं विचारोत्तेजक विमर्श प्रस्तुत किया गया। इसी अवसर पर उन्होंने अपनी स्वरचित कविता का पाठ कर श्रोतृवर्ग को भावविभोर किया। साथ ही मंच संचालन का दायित्व भी उन्होंने अत्यंत संयम, आत्मविश्वास, गरिमा एवं कुशलता के साथ निभाया, जिसकी विद्वत् समाज द्वारा विशेष सराहना की गई।

सम्मेलन के द्वितीय दिवस को डॉ. विनीता कंवर राठौड़ को दीप प्रज्वलन का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जो हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, सांस्कृतिक एकता एवं वैश्विक समरसता का प्रतीक बना। इसी अवसर पर उन्हें मॉरीशस के शिक्षा मंत्री एवं मानव संसाधन मंत्री को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करने का विशिष्ट अवसर भी प्राप्त हुआ, जो आयोजन की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान करता है।

इस संपूर्ण आयोजन की एक महत्वपूर्ण विशेष उपलब्धि विश्व हिंदी सचिवालय की महासचिव डॉ. माधुरी दिनकर जी का स्नेहिल मार्गदर्शन, आत्मीय व्यवहार एवं प्रेरक नेतृत्व रहा। उनके कुशल निर्देशन में सम्मेलन न केवल सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ, बल्कि सभी प्रतिभागियों को एक पारिवारिक वातावरण की अनुभूति प्राप्त हुई। हिंदी भाषा के प्रति उनका समर्पण, प्रवासी साहित्यकारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण तथा संवाद की सहजता सभी सहभागियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी।

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केवल अकादमिक विमर्श तक सीमित न रहकर हिंदी भाषा की उस वैश्विक चेतना का सशक्त प्रस्तुतीकरण बना, जिसमें विभिन्न देशों में बसे हिंदी प्रेमी एक साझा सांस्कृतिक सूत्र में बंधे हुए दृष्टिगोचर हुए। मॉरीशस जैसे बहुसांस्कृतिक राष्ट्र में हिंदी की सुदृढ़ उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि हिंदी आज विश्व पटल पर एक प्रभावशाली, सशक्त एवं सजीव संपर्क भाषा के रूप में स्थापित हो चुकी है।

डॉ. विनीता कंवर राठौड़ ने इस अवसर पर विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस, महासचिव डॉ. माधुरी दिनकर जी, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी संगठन, नीदरलैंड्स तथा समस्त आयोजकों एवं सहभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन प्रवासी हिंदी समाज को नई दिशा, वैश्विक पहचान और नवचेतना प्रदान करते हैं।

निस्संदेह, यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं शिक्षण के क्षेत्र में वैश्विक संवाद को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में स्मरणीय रहेगा।

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