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दहेज की लोभी कलयुगी माँ

बेटा ऊंची नाही मोहे सेज चाहिए बहू नहीं मोहे तो दहेज चाहिए,
कोख मे रखी थी तुझे नौ मास मेरे लाल अच्छी तरह मैने करी तेरी देख भाल भूखी मैं सो जाती थी,पीते पापा शराब सूखे में सुलाती थी खिलाती तुझे माल पति से कहती थी की अब डरेस चाहिए बहू नहीं मोहे तो दहेज चाहिए हम्मा हम्मा चले बेटा लगे खिलाडी मांगे घोड़ा गाड़ी मांगे गुड़िया की साडी M.A, B.A करवा दी पर कुछ ना मै मांगी इतना पढ़ा लिखा करके बेटा मैं क्या बिगड़ी सुद न रकम बस ब्याज चाहिए। बहू नहीं मोहे तो सेज चाहिए वो लड़की लूली लंगडी है वो एक आँख की कानी पढ़ा लिखा दमानंद मिले ससुर बन जाए दानी अनपढ़ है वो बेटा तुझसे डरती रहेगी मांगेगा तू खाना बहरी वो देवेगी पानी की माल मिलना बंद हो ऐसी भेस चाहिए बहू नहीं मोहे तो दहेज चाहिए जिनको तू पसंद किया वहां पैसा नहीं है ये लड़की लूली लंगडी है घर ऐसा नहीं है चिराग लेके ढूंढे पर दामाद न मिले अंधो मे काना राजा बेटा ऐसा नहीं है न बैंगम न मैडम न मिसेज चाहिए बहू नहीं मोहे तो दहेज चाहिए
बेटा ऊँची नाही मोहे सेज चाहिए बहू नहीं मोहे तो दहेज चाहिए माँ बापो ने मुश्किलों से औलादों को पाला लेकर दहेज समधी का निकाला दिवाला आज जली फिर जलती रही बहू माँ बापो ने बेटा के मुंह पर लगा दिया काला माँ बाप का न ऐसा मुझे भेष चाहिए
सियाराम को इंसाफ का संदेश चाहिए बहू से सूनी नाही मोहे सेज चाहिए सियाराम को ऐसा देश चाहिए सियाराम को ऐसा देश चाहिए।

इंसानियत का धर्म निभाईंये जात पात धर्म से बड़ा धर्म इंसानियत धर्म है।

अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला “अमन” सनातनी
सावनेर नागपुर (महाराष्ट्र)

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