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बीत रहे पलों संग सुनहरा हो कल

बीत रहे पलों संग सुनहरा हो कल यही फ़रियाद करते हैं।
संपूर्ण विश्व में कामयाब जन की बुनियाद खड़ी करते हैं।।

अपने मन-मस्तिष्क को नियंत्रित करते हुए व्यवहार करते हैं।
सद्भावनाएँ विद्यमान रहे, ऐसा शाकाहारी भोजन करते हैं।।
सुबह-शाम ईश्वर का सुमिरन करते हुए भजन गाया करते हैं।
जय श्री राम की अलख फिर पूरे जगत् में जगाया करते हैं।।

अतीत में सीखी गई गतिविधियों का वर्तमान में प्रयोग करते हैं।
प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रतिभागी बन कर प्रतिभाशाली बनते हैं।।
राह में आने वाली हर चुनौती का बड़े चाव से चुनाव करते हैं।
तनावग्रस्त रहने वालों की भी तकदीर बदल दिया करते हैं।।

बीते हुए समय ने हमें जीवन में बहुत कुछ सिखाया है।
कभी खुशी तो कभी गम के पाठों को दोहराया है।।
हमारे वृक्षों के समान बड़े बुज़ुर्गों ने सदा यही फ़रमाया है।
कर भला तो हो भला जैसी नेकियों ने ही हमें बचाया है।।

भूतकाल से सीखते हुए ही वर्तमान को सुरक्षित रखती हूँ।
अपनी कमज़ोरियों को हर पल मैं खूब परखा करती हूँ।।
बेबस व लाचार लोगों की सेवाओं में समय बिताया करती हूँ।
नारी धर्म निभाते हुए स्वाभिमानी भी बन जाया करती हूँ।।

बीत रहे पलों संग सुनहरा हो कल ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है।
बीते वर्ष संग आगामी साल भी खूबसूरत व बड़ा खास है।।

कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)

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