
हरिया एक साधारण किसान था, जिसका जीवन खेत की मिट्टी और बेटियों के भविष्य के बीच घूमता था। वह अनपढ़ था, पर उसका सपना बड़ा था—बेटियों को पढ़ाना।
एक दिन गाँव के प्रधान ने उसे चुनौती दी, “हरिया, इस बार अगर सबसे अच्छी फसल उगाई, तो मुँह माँगी रकम दूँगा।” हरिया ने इसे चुनौती नहीं, अवसर माना। उसने अपनी बेटियों से पूछ-पूछकर विज्ञान और मेहनत का संगम किया। बेटियों ने स्कूल में सीखी बातें बताईं और हरिया ने उसी अनुसार खाद, बीज और कीटनाशक का उपयोग किया।
उसकी लगन से खेत में रिकॉर्ड पैदावार हुई। प्रधान ने खुश होकर भारी रकम दी। हरिया ने उस धन से बेटियों को शहर के बड़े स्कूल में दाखिला दिला दिया।
सालों बाद, जब बेटियाँ उच्च पदों पर पहुँचकर गाँव लौटीं, तो हरिया समझ गया कि मेहनत और शिक्षा के मेल से ही जीवन की सबसे अच्छी फसल उगाई जा सकती है।
रजनी कुमारी
लखनऊ,उत्तर प्रदेश











