
हम्माम मे मौजूद हर शख्स खुद को एहतराम के काबिल जानता है
खुदा तो नहीं खुदा से कुछ कम भी नहीं मानता है
मिट्टी मे मिल जाता है ये गुरूर
जब शरीर आपका उसी मिट्टी मे दफन हो जाता है
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

हम्माम मे मौजूद हर शख्स खुद को एहतराम के काबिल जानता है
खुदा तो नहीं खुदा से कुछ कम भी नहीं मानता है
मिट्टी मे मिल जाता है ये गुरूर
जब शरीर आपका उसी मिट्टी मे दफन हो जाता है
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र
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