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परीक्षा में डर क्यों?

(प्रेरणादायक कविता)
परीक्षा में डर क्यों लगता है,
जब ज्ञान तुम्हारे संग चलता है।
मेहनत की ज्योति जलाकर देखो,
अंधेरा खुद ही हटता है।
कलम तुम्हारी तलवार बने,
सपनों का तुम श्रृंगार करो,
पन्नों पर साहस लिखते जाओ,
हर प्रश्न से तुम प्यार करो।
गलती भी गुरु बन जाती है,
जब हौसला कम न होता है,
जो गिरकर फिर उठ जाता है,
वही असली वीर कहलाता है।
नंबर से मत खुद को तोलो,
तुम अनमोल हो, याद रखो,
कर्म तुम्हारा साथ देगा,
बस मन में विश्वास रखो।
माँ की दुआ, गुरु का आशीष,
तुम्हारे सिर पर छाया है,
मेहनत, धैर्य और लगन ने
सफलता का दीप जलाया है।
तो फिर परीक्षा से डरना क्या?
यह तो बस एक सीढ़ी है,
आज पसीना, कल मुस्कान—
यही जीत की असली पीढ़ी है।
आकांक्षा











