
(चौपाई छंद)
प्राणमय कोष तन में रहता,
जीवन दीप सदा ही जलता।
धीमी श्वास सुख देकर जाती,
तन-मन में हरियाली छाती॥
गहरी श्वास जो रोज़ लेता,
तन का संतुलन ठीक कर देता।
मन की दौड़ धीमी हो जाती,
भीतर शांति जगह बनाती॥
क्रोध डर जब मन पर छाते,
श्वासों के सुर बिगड़ जाते।
तेज़ हवा सा प्राण बहाता,
तन को जल्दी थका ही जाता॥
योग ध्यान अभ्यास सहारा,
श्वास बने जब धीमा धारा।
प्राण सुधरते, मन थिर होता,
भीतर सुख का दीपक जलता॥
दिखता नहीं मगर है प्यारा,
जीवन शक्ति का यह धारा।
श्वासों में इसका है वास,
यहीं छिपा जीवन प्रकाश॥
प्राणमय कोष जो पहचाने,
श्वासों का सम्मान भी जाने।
सुख, स्वास्थ्य, शांति का सार,
प्राण ही जीवन का आधार॥
योगेश गहतोड़ी “यश”











