डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ के काव्य संग्रह उच्छवास की सांस को मिला पेंटागन विश्व रिकॉर्ड सम्मान
मुलताई/बैतूल – नगर के वरिष्ठ साहित्यकार स्व. नरेन्द्र पाल सिंह पुण्डीर की साहित्यकार सुपुत्री डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ के काव्य संग्रह उच्छवास की सांस को आई एस ओ द्वारा पेंटागन वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रदान किया गया है। साहित्यिक जगत के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। उनके काव्य संग्रह ‘उच्छवास की सांस को आधिकारिक तौर पर पेंटागन वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा मान्यता दी गई है।
साहित्य के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ के काव्य संकलन उच्छ्वास की सांस को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।
उनकी कृति को समकालीन हिन्दी कविता में नारी संवेदना, मानवीय भावनाओं और साहित्यिक उत्कृष्टता को उजागर करने वाले इसके अद्वितीय वैश्विक योगदान के लिए सराहा गया है। उनकी रचनायें स्त्री मन और मानवीय अनुभूतियों की गहरी समझ को प्रस्तुत करती है।
सैकड़ों सम्मनाओं से सम्मानित डॉ अनुमेहा को कुछ दिन पूर्व ही आर्टिस्ट प्रेम पब्लिकेशन हाउस, नई दिल्ली द्वारा ‘अनसंग हिरोज अवार्ड’ एवं नव प्रज्ञा काव्य फाउंडेशन द्वारा ‘सावित्री बाई फुले रत्न सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया है।
बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ के लेखन में सहजता, सरलता के द्वारा समाज में व्याप्त मानवीय मन को रूपांतरण करने की क्षमता है।
इनकी रचनाएं एवं आलेख देश-विदेश की पत्र/पत्रिकाओं/न्यूज पेपर्स में लगातार प्रकाशित होते रहते है। गूगल की 14 वेबसाइटों पर उनकी बायोग्राफी एवं बायोपिक उपलब्ध है। दो बार की वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ पल्लवी गद्य एवं पद्य में समान रूप से सृजन करती है, जो उनके प्रकाशित काव्य संग्रहों और पुस्तकों ने दृष्टिगत होता है।











