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शिव महिमा

फागुन आया मास है,छाई बसन्त बहार।
भक्ति भाव उर धारकर, आई तेरे द्वार।
मात-पिता परिवार हो,तुम ही भोलेनाथ,
भव से नैया पार हो,सुन लो करुण पुकार।।

करें मंत्र का जाप नित,नमः शिवाय महान।
मिटता है संताप सब,पूरित हों अरमान।
नीलकंठ बनकर सदा,करते जग कल्याण,
शंभु कृपा जिसको मिले, चढ़ता वह सोपान।।

शंभु नाम जपते रहो, जब तक घट में प्राण।
सुनते सब की है सदा,शिव करते कल्याण।
असफल वह होता नहीं,जिसमें दृढ़ विश्वास,
आश पूर्ण उसकी करें,कष्टों का निर्वाण।।

मनभावन छवि शंभु की, रचते सभी विधान।
धर्म सनातन मूल है,बनी विश्व पहचान।
निर्मल मन के भाव से, पूजन करते भक्त,
सब देवों के देव हैं, महादेव भगवान।।

चंद्र सोहता भाल है ,शीश बिराजें गंग।
भक्तों पर उपकार कर,रहते भोले संग।
जयकारा है नाम का,महिमा बड़ी अपार,
जो सुमिरन निशि-दिन करे, उसके हृदय उमंग।।

डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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