
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित, राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार एवं स्नेह संबंध साहित्य सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में भगवान शिव एवं जगज्जननी पार्वती के पावन परिणयोत्सव महाशिवरात्रि के मंगल अवसर पर २३६वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी अत्यंत गरिमामय एवं आध्यात्मिक भाव-सिक्त वातावरण में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में शिव-शक्ति के दिव्य मिलन की महिमा का काव्यमय अभिनंदन किया गया।
संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि दो चरणों एवं चार घंटों के कार्यक्रम की अध्यक्षता स्नेह संबंध साहित्य सेवा संस्थान की ओर से कानपुर उप्र से जुड़े वचन शाह ने की एवं मुख्य अतिथि के रूप में हैदराबाद तेलंगाना, से जुड़े चंद्र प्रकाश गुप्ता ‘चन्द्र बुंदेला’ ने अपने उद्बोधन में शिव-विवाह के आध्यात्मिक रहस्यों का मार्मिक विवेचन किया।
कैथल हरियाणा से जुड़े ज्योतिषाचार्य श्री जीतेंद्र शास्त्री जी जी ने गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, एवं शिव तांडव स्त्रोत, के मधुर स्तवन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संचालन की सुव्यवस्थित बागडोर कोंच जालौन उप्र से जुड़े भास्कर सिंह माणिक तथा मुंबई महाराष्ट्र से जुड़ी डॉ. अनामिका दुबे ने अत्यंत कुशलता एवं सुसंस्कृत शैली में संभाली।
इस काव्य-महायज्ञ में डॉ सीमा बिरला, सीमा शर्मा, ज्योतिषाचार्य जितेंद्र शास्त्री, वरिष्ठ शिक्षिका ज्योति प्यासी, विजय रघुनाथराव डांगे, बिनोद कुमार पाण्डेय, दिनेश कुमार दुबे, अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’ डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, संध्या श्रीवास्तव ‘साँझ’, वचन शाह, चन्द्र प्रकाश गुप्ता, डॉ अनामिका दुबे, भास्कर सिंह माणिक, दीदी राधा श्री शर्मा तथा पवनेश मिश्र ने अपनी भावपूर्ण एवं अलंकृत रचनाओं से शिव-पार्वती विवाह की दिव्य लीला को शब्द-अर्पण किया।
समापन सत्र में सीवान बिहार से जुड़े बिनोद कुमार पाण्डेय ने राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” का ओजस्वी गायन कर वातावरण को राष्ट्रभाव से ओतप्रोत कर दिया।
आभार प्रदर्शन कल्पकथा साहित्य संस्था की संस्थापक दीदी राधा श्री शर्मा तथा स्नेह संबंध साहित्य सेवा संस्थान की संस्थापक डॉ. सीमा बिरला ने करते हुए समस्त सहभागी सृजनकारों, पदाधिकारियों एवं श्रोताओं के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।
इस प्रकार शिव-शक्ति के पावन विवाहोत्सव पर आयोजित यह काव्यगोष्ठी भक्ति, संस्कृति एवं साहित्य-साधना का एक अनुपम संगम सिद्ध हुई, जिसने सहभागी जनों के हृदय में आध्यात्मिक चेतना और साहित्यिक समन्वय का दिव्य दीप प्रज्वलित किया।












