
हनुमान जन्मोत्सव की मची है धूम,
जश्न मना रहे है भक्त,घुम घुम,
लहरा रहे है ध्वज केसरिया रंग का,
दिल मे है जोश जज्बा उमंग का।
केसरी अंजना के पुत्र हनुमान ,
भक्त थकते नही,करते उसका गुणगान,
भोले शंकर के है,रूद्रावतार ,
भक्त लगाते है ,नारे जय जयकार।
वायु सा है गतिमान रखता,
वाणी मे है व्याकरण की शुद्धता ,
अपार बलशाली राम भक्त,
वज्र जैसे है तन,हनुमान के सख्त।
पवन पुत्र भी कहलाये हनुमान ,
दुश्मनों का करे ,,काम तमाम,
लिये जो भक्त,प्रेम भक्ति से नाम,
उस भक्त के ह्रदय मे करे,विराम।
चुन्नू कवि क्या करे?अब बखान,
शब्द कम हो जाते है,आते ही नाम,
कुल मिलाकर एक ही बात है,कहना,
दिवस भर मे,नाम जरूर एकबार लेना।
ह्दय मे वो बसाये रखे है,सीताराम
हनुमान को जो भक्त लेंगे नाम,
हनुमान के साथ ही,जप लेंगे सीताराम ,
बजरंग बली,महावीर,हनुमान,,है और अनेक नाम।
अंतिम पंक्ति बस,इतना ही लिखता हूँ ,
सानिध्य मे हनुमान का रहना चाहता हूँ ,
कृपा दृष्टि सदा बनाये रखना,हनुमान ,
भक्त हूँ तेरा लेकिन हूँ थोडा नादान।
चुन्नू साहा पाकूड़ झारखण्ड












