
चले आओ नया गुलशन बनायेंगे।
सभी मिल कर नृत्य घूमर दिखाएंगें
चले आओ सजन हर जन्म के साथी।
बिसर सब दुख चलो बाजार चढ़ हाथी।।
मिला जीवन किया सेवा जगत जीता।
कर भलाई बिता जीवन बना गीता।।
कठिन कुछ भी नहीं पर्वत हिला बन्दा।
करो ऐसा करें पूजा कटे फंदा।।
समय पर पढ़ सभी करते शयन बच्चे ।
उछल कूद कर सभी खेलो अभी कंचे।।
सभी सम तुल्य ही जानो यही मानो।
रखो सम भाव जीवन को यहां जानो।।
डॉ.राजेंद्र कुमार रुंगटा
बिलासपुर छत्तीसगढ़ वाले हैदराबाद












