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अपने भ‌ईल गैर

विधा : भोजपुरी
भोजपुरिया आदमी होके ,
भोजपुरिए से भ‌ईल बैर ।
क‌ईसे समझीं हम आपन ,
जब अपने हो ग‌ईल गैर ।।
केहू से ना शिकवा गिला ,
भोजपुरी आपन शान बा ।
भोजपुरिए ह जीवन शैली ,
भोजपुरी खास प्राण बा ।।
भोजपुरिया के बा प्राथना ,
भोजपुरियो के सम्मान दीं ।
अनुसूची में होखे शामिल ,
भोजपुरी के अरमान दीं ।।
हिन्दी बाटे हिन्द के रीढ ,
भोजपुरी ओकर हड्डी बा ।
मास नश चाम त बाद में ,
हड्डी संग काहे कबड्डी बा ।।
रीढ़ हड्डी से बनल ढाॅंचा ,
मास नश चाम से साॅंचा ।
रीढ़ हड्डी से तन त‌ईयार ,
नाक मुॅंह कान में खाॅंचा ।।
भोजपुरी पर ध्यान दीहीं ,
अनुसूची में स्थान दीहीं ।
हाथ जोड़ बाटे निवेदन ,
भोजपुरी ला ठान लीहीं ।।
हम भोजपुरी नेक बानीं ,
एक एक कके एक बानीं ।
कवनों होखे देश प्रदेश ,
बिन खम्हा के टेक बानीं ।।
हर भाषा अभिषेक बानीं ,
सरस संस्कार चेक बानीं ।
हम भोजपुरी सरल सहज ,
हम भोजपुरी विवेक बानीं ।।


अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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