
पहली अप्रैल का आया दिन,
हँसी से भर जाता है मन।
इस दिन सब मज़ाक करते हैं,
सब मिलकर थोड़ा हँसते हैं।
कोई कहे — “आज छुट्टी है”,
सुनकर दिल भी खुश होता है।
थोड़ी देर में सच यदि पाया,
सब कहते — “फूल बनाया!”
पहले लोग इसी दिन मानें,
नए साल की खुशियाँ जानें।
जब से जनवरी आगे आई,
कुछ को बात समझ न आई।
उन पर हँसी सबने उड़ाई,
“अप्रैल फूल” की बात बताई।
तभी से ये दिन चलन में आया,
हँसी का रंग साथ में लाया।
आज भी हम यही मनाते,
दोस्तों संग हँसी बाँटते।
पर एक बात याद रखें,
किसी का दिल न हम तोड़ें।
हँसी रहे और प्यार रहे,
हर चेहरे पर बहार रहे।
यही है इस दिन का उसूल,
खुशी बाँटो — बनो न फूल।
योगेश गहतोड़ी “यश”











