
संघर्ष अनसुलझी कहानी है,
दिल में उम्मीद आँखों में पानी है।
परिवार को पालना मजबूरी नहीं,
अच्छे गृहस्थ कि निशानी है।
औरत हो या हो पुरुष,
सबकी यही कहानी है।
पुरुषों की संघर्ष क्या सुनाऊं,
आराम उनके हिस्से में नहीं आनी है।
हमेशा मेरा परिवार सुखी हो,
दिन रात चिंता सतानी है।
चिंता में व्यवहार गरम करे तो,
घर में झगड़ा हो जानी है।
घर हो या दफ़्तर हो ,
पुरुषों की संघर्ष भरी कहानी है।
औरतों की अनसुलझी कहानी,
दिल में उम्मीद आँखों में पानी।
घर संभाले दफ्तर भी संभाले,
फिर भी तानों भरी जिंदगानी है।
संघर्ष भी खूब है करती,
सफलता के उम्मीद में
सफलता तो मिल भी जाती,
सम्मान को कमानी है।
कल तक बेटियां घर पर थीं,
आज चांद तक बेटियों की कहानी है।
बेटों से कम नहीं है बेटियां,
सबको यह बतानी है।
संघर्ष करो तो सफलता मिलेगी ,
यह परम सत्य जुबानी है।
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़











