
आदित्य का रथ जब अस्ताचल जाता है,
निशा के जादू से भुवन थम जाता है।
हिरण सा चंचल मन शांत कहां होता है?
“ओम नमः शिवाय” तब जपा जाता है।
मानव मन के डर अंधेरे में सर उठाते हैं।
शिव वाहन नंदी डर को तब कुचल देते हैं।
नंदीश्वर शिव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं,
“ओम नमः शिवाय” तभी तो सब जपते हैं।
लोभ,मोह, द्वेष,द्वंद,ईर्ष्या आदि सब रंग,
जब भक्तों के शांत जीवन को करते हैं भंग,
सभी रंगों को धारे मोर यह शिक्षा देते हैं,
“ओम नमः शिवाय” जाप इनसे रक्षा करते हैं।
जग में रहकर भी पद्म पत्र सा होना चाहे,
सुख में दुख में रहकर भी इनसे बचना चाहे,
कर्तव्य समस्त निर्विकार हो करता जाए,
ओम नमः शिवाय जप निरंतर करता जाए।
सुलेखा चटर्जी












