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ग़ज़ल – “इबादत की मुस्कान”

– ओम कश्यप

चाहतों पे हँसी लाना मेरी आदत है,
टूटे दिलों को जोड़ देना ही इबादत है।

किसी की आँख में आँसू मुझे अच्छे नहीं लगते,
मेरी हर एक दुआ में बस मोहब्बत है।

मैं दर्द को भी मुस्कुरा कर गले लगाता हूँ,
यही तो जिंदगी की सबसे बड़ी शराफ़त है।

नफरत की आँधियाँ लाख कोशिश करें मगर,
दिल में उजाला रखना ही मेरी विरासत है।

जो गिर पड़े हैं राहों में, उन्हें थाम लेता हूँ,
किसी का हाथ पकड़ लेना बड़ी इबादत है।

मुझे नाम या शोहरत की तमन्ना नहीं कोई,
किसी के होंठों की हँसी ही मेरी दौलत है।

“ओम कश्यप” ये सफर यूँ ही चलता रहेगा,
दिलों में प्यार जगाना ही मेरी हकीकत है।

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