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कहानी- पिता का स्नेह

एक गाँव में एक पिता अपने पुत्र के साथ जा रहा थे, अचानक रास्ते में बारिश तेज हो गई और नदी में पानी बढ़ गया था। पिता ने पुत्र से कहा मेरा हाथ पकड़ कर चलो, हम नदी पार कर लेंगे पर पुत्र ने पिता का हाथ नहीं पकडा l पिता के बार-बार कहने पर भी पुत्र ने हाथ नहीं पकडा तो पिता ने खुद उसका हाथ पकड़ लिया और खींचकर नदी के पार ले गए और बोले मैं इतनी देर से बोल रहा हूँ , मेरा हाथ पकड़ लो तो हाथ क्यो नही रहे हो l इस पर पुत्र ने बहुत ही प्यारा दिल को छू लेने वाला उत्तर दिया- मेरे पालनहार मैं बहुत ही कमजोर और दुर्बल हूँ, मुझे खुद पर भरोसा नहीं था l यदि मैं हाथ पकड़ता, तो छोड़ सकता था लेकिन मुझे आप पर भरोसा था कि यदि आपने हाथ पकडा तो कभी नहीं छोड़ोगे, इसीलिए मैंने हाथ नहीं पकडा था l मोरल- दुनिया में माता – पिता ही ऐसे है जिन पर खुद से ज्यादा भरोसा किया जा सकता है l जब तक वो जीवित है अपनी जान देकर भी संतान की रक्षा करते हैं l

रचनाकार- नंदकिशोर गौतम ( माध्य. शिक्षक) , शास. उच्च. माध्य. विधालय बकोड़ी, ब्लॉक कुरई, जिला सिवनी, म. प्र.

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