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अंतर्राष्ट्रीय मानवता एवं चिंतन दिवस

आओ आज कुछ चिंतन कर लें ,
मानव हैं हम मानवता ये भर लें ।
लोभ क्रोध ईर्ष्या को तज दें हम ,
संग संग जी संग संग मर लें ।।
नहीं किसी से हम दूरी बनाऍं ,
गले लगाकर सबसे ही वर लें ।
गरीब निर्धन को गले लगाकर ,
भवसागर को भी हम तर लें ।।
नहीं सताऍं किसी भी दुखी को ,
उनकी आह से ही हम डर लें ।
सबका होता सम्मान जहाॅं पर ,
चयन हम भी फिर वही दर लें ।।
सीखें करना सम्मान सबका ,
छल कपट मन न हम घर लें ।
त्याग क्रूरता दया ही अपनाऍं ,
जन जन के दुःख हम हर लें ।।
गिरते को हम कंधा लगा दें ,
जिम्मेदारी अपने हम सर लें ।
ऊॅंच नीच का भाव हम त्यागें ,
आओ संकल्प ये नारी नर लें ।।

अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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