
माँ की मूरत यूं प्यारी हैं,
जगदम्बै की अवतारी है।
वो करती शेर की सवारी हैं,
दुर्गा मैया की महिमा न्यारी है।।
वो पैदल तेरे दर पर आते,
वो मिलकर यूं भंडारे करते।
फल,फूल और नैवेद्य चढाते,
वो लाल चुनरिया तुम्हें ओढा़ते।।
लाल मिठाई का भोग लगाते,
हाथों में तेरी ध्वजा लहराते।
सदा भक्त तेरे जयकारे लगाते,
माँ तेरा निशदिन वो ध्यान धरते।।
माँ मानवता की राह दिखा दे,
हमारी मनोकामना पूर्ण कर दे।
भक्त सदैव तेरा ही स्मरण करते,
तेरे चरणों में हम शीष झुकाते।।
स्वरचित,मौलिक,अप्रकाशित है।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












